यलग़ार
उठ कामगार।
कर यलग़ार।।
अन्याय विरूद्ध,
संघर्ष पुकार,,
लगा इंक़लाब का,
ऐसा नारा,
हिल जाए,,
संसद की दीवार।
उठ कामगार।
कर यलग़ार।।
कामगार विरोधी,
क़ानून को प्यारे,
आग लगा दे,आग लगा दे,
या करदे तड़ीपार।
उठ कामगार।
कर यलग़ार।।
पेन, पाने, पेचकस को,
बना हत्यार,
कामगार विरोधीयों पर,
कर तीखा प्रहार,
सीने को बना,
फौलादी ढाल,
खींच ले तू खींच ले,
शोषण कर्ताओं की खाल,
मांग कर नहीं,
छीन कर ले,,
अपना अधिकार।
अपना अधिकार।।
उठ कामगार।
कर यलग़ार।।
चल रही है भारत में,
खाजगीकरण की बयार,
नाकाम करदे,
इनकी चाल, इनकी चाल,
वर्ना ------वर्ना
भूखों मर जाएगा,
तू और तेरा परिवार,
और -----और
तेरी बर्बादी का,
जश्न मनाएंगे,
देश के कर्णधार।
सावधान, होशियार, खबरदार।
कामगार विरोधी है,
पुंजिपतियों की सरकार,
कर नहीं सकती जो,
तेरा उध्दार, तेरा उध्दार,
इसलिए ---इसलिए,
उठो कामगारों जागो।
कामगार विरोधीयों पर,
अचूक निशाना साधो।।
जमील अंसारी
हिन्दी, मराठी, उर्दू कवि
हास्य व्यंग्य शिल्पी
कामठी, नागपुर

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