बुधवार, २४ सप्टेंबर, २०२५

भगवान मैंने कनक न मांगा--कलाम अहमद खान

 





                   भगवान मैंने कनक न  मांगा 
                    तांबा, कांसा चल जाएगा...


जितनी मेरी औकात है जानी

दिया तुमने उससे ज्यादा

किंतु महंगाई भी बढ़ी है

आय सीमित है, मिले न ज्यादा


श्रद्धा मेरी अपार है किंतु

महंगे हो गए पूजा-दर्शन

इएलिए धन और भी देना

शेष फिर तुझे ही अर्पण


इतना दे दे इस निर्धन को

कामकाज न टल पाएगा

भगवान मैंने कनक न मांगा

तांबा, कांसा चल जाएगा...


स्वर्ग की तेरे परी न चाहूं

पर संगिनी खरी ही देना

पतझर से मुझे क्या लेना है

देना जो हरीभरी ही देना


मैं न मांगू ज्यादा तुझसे

और करूं एक वादा तुझसे

जो दिया स्वीकार करूंगा

शिकवा मैं न करूंगा तुझसे


किंतु वधू ऐसी ही देना

देखनेवाला जल जाएगा

भगवान मैंने कनक न मांगा

तांबा, कांसा चल जाएगा...

-कलाम अहमद खान

भिवापुर, जि. नागपुर


कोणत्याही टिप्पण्‍या नाहीत:

टिप्पणी पोस्ट करा

खरा तो एकची धर्म, जगाला प्रेम अर्पावे....सौ. मनीषा विशाल सोन्नेकर

      मनुष्य हा देखील एक प्राणीच. मात्र, इतर प्राण्यांपेक्षा अतिशय हुशार व तर्कबुद्धी असलेला आणि चांगल्या विचारविनिमयाची कास धरणारा प्राणी. ...