शब्दशिल्प/डेह/नागौर - अखिल भारतीय राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष समिति एवं नेम प्रकाशन डेह की ओर से विश्व मजदूर दिवस पर मजदूरों की दशा एवं दिशा पर पवन पहाड़िया की अध्यक्षता में ऑनलाइन गोष्ठी आयोजित हुई।
रोडवेज यूनियन नागौर शाखा के पूर्व अध्यक्ष एवं मजदूर सतसई के प्रणेता राजस्थानी के वरिष्ठ साहित्यकार लक्ष्मण दान कविया ने कहा कि दुनिया का मजदूर आज दुःखी हैं। मशीनरी के बढ़ते उपयोग के कारण दिनों-दिन मजदूरों के रास्ते अवरूद्ध हो रहे हैं। जहां पहले हजारों मजदूरों की कल कारखानों, बांध, पुलिया, सड़क, भवन,रेल, बड़ी इमारत निर्माण में जरूरत होती थी लेकिन आज मशीनरी ने मजदूरों के हक को मार दिया है।आज ऐसे कठिन परिश्रम वालें कार्यों में दस फीसदी मजदूरों को भी जगह नहीं मिलती। कविया ने मजदूर सतसई लिखकर जन मानस एवं सरकारों से मजदूरों के हितों की रक्षा करने का आग्रह किया है। इस कृति में दुनिया के मजदूरों की दशा एवं दिशा पर काव्यात्मक प्रकाश डाला है।
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( शब्दशिल्प प्रकाशन से पुस्तक प्रकाशित करे। संपर्क : प्रकाशक, कलाम अहमद खान_9657347688)_____________________________________________
गोष्ठी में राजस्थानी युवा गीतकार प्रहलाद सिंह झोरड़ा ने कहा कि बढ़ती मशीनरी का उपयोग मजदूरों के लिए चिंता का विषय है फिर भी काम करने की चेष्टा हो तो कहीं न कहीं मजदूर को मजदूरी मिल ही जाती है।श्रीराम वैष्णव ने कहा कि पुरूषार्थ प्रवृत्ति से व्यक्ति को अपने रोजगार के लिए रास्ता मिल ही जाता है। गांवों एवं शहरों में आज भी कई कार्य केवल मजदूरों पर ही निर्भर है। गोष्ठी में अध्यक्ष पवन पहाड़िया ने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों के कार्यों में मजदूरों की जरूरत हमेशा रही है और आगे भी रहेगी।सारे काम मशीनों के भरोसे नहीं हो सकते। मशीनों को चलाने के लिए भी इंसानी जरूरत होती है। सरकार को धन्यवाद देना होगा जो करोड़ों मजदूरों को वर्ष में 125 दिन की मजदूरी अनिवार्य रूप से देती आ रही है जिससे मजदूरों के जीवन स्तर में बढ़ोतरी हुई है।
ऑनलाइन गोष्ठी में गजादान चारण,सुखदेव सिंह,सांवलदान कविया, फतुराम छाबा,सतपाल सांदू, भंवर वैष्णव, गोपाल तंवर,संदीप, नवीन, भूपेंद्र, रमेश,ताराचंद वैष्णव, अरविंद कविया सहित अन्य जुड़े रहे।


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