शनिवार, १७ जानेवारी, २०२६

समरसता का महापर्व मकर संक्रांति पर लें संकल्प

 


आलेख

मकरसंक्रांति का सामाजिक , धार्मिक , खगोलीय, ऐतिहासिक , आध्यात्मिक, पौराणिक  और भौगोलिक महत्व है ।  कहावत भी संक्रांति आए ठंड भगाए। ऋतु परिवर्तन संकेत मिलता है। सूरज देव का महापर्व है। जो हर प्राणी को सकारात्मक ऊर्जा , मन के नकारात्मक अँधेरे को दूर करके गति , स्वास्थ्य , ज्ञान का प्रकाश देता है।


युग - युग से पौष - माघ की  भारत में  सर्द शीत  में

चारों दिशाओं में जन - मन इस पर्व को  मनाते हैं।

निसर्ग का उत्सव मकर संक्रांति है।सूरज मकर राशि में जाके उत्तर दिशा में सरकता  जाता है।

यही काल  उत्तरायण कहलाता  है।मकर से 6 माह तक सूर्य उत्तरायण में रहते है। मैंने गंगा सागर की यात्रा की । बंगाल की खाड़ी में आकर माँ गंगा का संगम होता है  । इसलिए यहाँ का खारा जल मैया गंगा की वजह से हल्का खारा है क्योंकि मुझे इस जल को पीकर स्वाद का अनुभव करके यथार्थ को जाना । हर सागर , महासागर का जल खारा होता है। कनाडा के पैसिफिक महासागर का स्वच्छ जल पीया तो उसका पानी नमक की तरह था।इसी पर्व पर इसके पावन तट पर 10 लाख से अधिक श्रद्धालु पितरों का तर्पण यहाँ पर करते  हैं । नर विष्णु सहस्रनाम का पाठ करके मोक्ष को प्राप्त कर सकता है।मांगलिक, शुभ कार्य की शुरुवात कर सकते हैं ।

तभी दूरदर्शी भीष्म ने  मोक्ष  हेतु इसी दिन 

प्रकाशमय मृत्यु का  वरण किया।

दक्षिण भारत में इसे पोंगल , पश्चिम में उत्तरायण ,

पूर्व में माघविदू , पंजाब में लोहड़ी  के रूप में मनाते हैं।

खेती के इस पर्व  पर लहलहाती फसलों को  किसान   खलिहानों में परिश्रम की पकी  फसलों को लाता है। इसी खुशी में पंजाब , हरियाणा , हिमाचल प्रदेश में संक्रांति की पूर्व संध्या पर लोहड़ी पर्व को मनाते हैं ।

घोर चिल्ला जाड़े में ठिठुरते , उत्साहित  हजारों नर - नारी , युवा , बाल - बूढ़े  संत , साधु , महात्मा ,पावन हिम नदियों , गंगा , गंगा सागर , यमुना , ,गोमती, सरयू , संगम और नर्मदा आदि पावन तीर्थ  नदियों  में लोग हाथों में हाथ लें सगे - संबंधियों की नाम की आस्था की  डुबकियाँ लगा के स्नान करते है।

मन - तन का मैल धो के पापों का विसर्जन करते  हैं । श्रद्धालु घाटों पे सजे घाटियों  , पंडाओं   के मंडपों पर जाके चंदन का तिलक लगवा के  गुड की भेली , तिल के लड्डूओं, पापड़ , खिचड़ी , अर्थ , चौदह वस्तुओं का दान कर पुण्यार्जन कमाते  हैं । कम्बल , धन , रेवड़ी ,गुड़  चावल , दाल घी और तिल आदि का दान करके महा पुण्यफल पाने की लालसा होती   है और बड़ों का आशीर्वाद लेना चाहिए ।  सूरज की तरह सब गुण को अपने भीतर लाएँ । सूर्य का उदय   - अस्त पूरे भारत में  अलग समय में होता है।शुभ मुहूर्त  समय में पूजा करनी चाहिए। 


 यह पर्व धार्मिक प्रवृति का मानव में उदय हो के सन्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। 

विभिन्न ज़ाति .  संप्रदायों , धर्म , लिंग , वर्ण , नस्ल के लोगों के लिए आस्था की ये  परोपकारी नदियाँ 

ऊँच - नीच , अमीर - गरीब . लैंगिकता का भेद- भाव न कर के  विश्व की ऐक्य मानव जाति  की समरसता , सद्भाव , सामाजिकता को दर्शाती हैं।

इस दिन से  तिल - तिल दिन  बढ़के रातें छोटी होने लगती है। 

  साकारात्मक ऊर्जा , स्वास्थ्य से भरे तिल- गुड लड्डू खिचड़ी पोष्टिक , स्वास्थवर्धक है। लड्डू में   नेह की मिठास भरी होती है। जो दरकते रिश्तों में आत्मीयता प्रेम को  ला के संबंधों को जोड़ता है। हमारे जमाने में माँ तिल लड्डुओं में सोने - चाँदी का सिक्का रख करते गुप्त दान भी करती थी । हल्दी - कुंकुम की रस्म अदा Back सुहागिनें अखंड सुहाग की सलामती की दुआ करती हैं।

 मैदानों , छतों पर रंग - बिरंगी आशाएं लिए  उल्लासित पतंग को उड़ानें मन को आनंदित कर देती है।सूर्य स्नान से विटामिन ड़ी भी मिल जाता है  ।

सूत्रधार के हाथों में होती इन पतंगों की डोर।जो हस्ती - मस्ती जानती हैं ।ये ख़ाक में मिलने से पहले हौसलों की उड़ानों से जी - जान से आसमान  को छूती है। जिन्दगी भी इसी की बने  मिसाल ।मकर संक्रांति में छतों पर जाकर कई पीढ़ी अपने बच्चों के संग पतंग उड़ाती हुए देख सकते हैं। हम  ग्लोबल  मकर सक्रांति पर संकल्प करें  कि पतंग ऐसे उड़ाएं  कि पतंग का माझा  बेजुबान पक्षी  को शारीरिक क्षति न पहुँचाएँ। वे जख्मी हो जाते हैं । इनके लिए उपचार केंद्र भी हों। हर साल चीनी मांझे से  बाइक सवार बच्चे  - बड़े भी चपेट में आ जाते हैं जिनसे वे जख्मी हो जाते हैं। कितनों की गर्दन आदि कटने से मौत भी हर साल हो जाती हे।  यह पावन पर्व सामाजिक समरसता , सद्भाव को तो लाता है । ऐसे पतंगबाजी का खेल   आनंद  से खेलें लेकिन रंग में भंग न पड़े।  इंसान किसी  भी प्राणी को माझे से हानि न पहुँचाए। प्रकृति , प्रभु सूर्य देव , धरती  और अन्नदाता किसानों को हम कृतज्ञता प्रदान करें । सांस्कृतिक एकता के इस पर्व पर जीवन में हम इनकी तरह संतुलन बनाएँ।

 - डॉ मंजु गुप्ता 

वाशी , नवी मुंबई .

कोणत्याही टिप्पण्‍या नाहीत:

टिप्पणी पोस्ट करा

खरा तो एकची धर्म, जगाला प्रेम अर्पावे....सौ. मनीषा विशाल सोन्नेकर

      मनुष्य हा देखील एक प्राणीच. मात्र, इतर प्राण्यांपेक्षा अतिशय हुशार व तर्कबुद्धी असलेला आणि चांगल्या विचारविनिमयाची कास धरणारा प्राणी. ...