शुक्रवार, ५ सप्टेंबर, २०२५

पलाश (कविता)-- देवकी दर्पण

 


  पलाश (कविता)

ढाक छोला छूरा छूल,यह तरु मत भूल, 

नाम कई अनुकूल, सुखदायी वृक्ष है। 

किंशुक पलाश केसू,खाँखरा सुपर्णा टेसू, 

ब्रह्म वृक्ष केसूदो सूं, नाम धारी रुक्ष है। 

परसा पलास जान, कई गुणो वाली खान, 

यह खूब पाया मान, बहु काम दक्ष है। 

इसे सुखी भाग कहे, प्रेम वाला राग कहे, 

जंगल की आग कहे, सुखदायी पक्ष है।।१।। 


उत्तर प्रदेश मूल, झारखण्ड अनुकूल, 

दोनो का है राज्य फूल, तेरी बड़ी शान है।

भारतीय डांक तार,टेसू टिकट लगार,

बही प्रेम रसधार,पुष्प दिया मान है। 

मध्यम आकार भाया, ऊँचा लगभग पाया,

पन्द्रह मीटर काया,तरु ये महान है। 

तरु तना सीधा राखा, अनियमित शाखा, 

हर मोसम को चाखा,तरु प्रीत गान है।।२।। 


खुरदरा होता तना, पल्लव धूसर घना, 

खूब रोयेंदार बना, पेड़ बड़ा कास है। 

छाल राख रंग की है, रचना उमंग की है, 

पुष्प प्रीत चंग की है, होली रंग वास है। 

तरु जड़ बीज फूल, पत्तियों से लेके मूल, 

ओषधियाँ अनुकूल,कभी न निरास है । 

आयुर्वेद दवा रंग,इस्तेमाल अंग अंग,

आया चला संग संग, कीमती पलास है।।३।। 


आयुर्वेद वायदा है, पूरा पूरा कायदा है, 

बवासीर फायदा है, इस्तेमाल फूल कर, 

मिटाता सुगर रोग, चर्मरोग सहयोग, 

आँखे करता निरोग, प्राणी मत भूल कर। 

पेट कीड़ो मे दे साथ, भूख खोलने मे हाथ,

शृद्धा झुकाये माथ,पूरा वसूल कर।

वही प्राचीन बात, वही मुहावरा गात,

वही ढ़ाक तीन पात, गाते रहो फूल कर।।४।। 


भारत मे बड़ी माया, दक्षिण एशिया भाया,

पूर्व दक्षिण मे पाया, सुखकारी वृक्ष है।

बाग्लादेश पाकिस्तान, बहुत नेपाल मान, 

कम्बोडिया पहचान, गुणकारी वृक्ष है। 

थाईलैंड मलेशिया, श्री लंका को कास किया, 

किसे न उदास किया, बळकारी वृक्ष है। 

बंगाल मे कीनो जाने, बास्टर्ड टीक माने, 

कई गुण पहचाने, लाभकारी वृक्ष है।।५।। 


भारतीय फूल वृक्ष, उनमे से एक रुक्ष, 

तरु गुणवान दक्ष, बड़ी पहचान है। 

महिमा ऋग्वेद गाई, वह नव ग्रह भाई,

ग्रह की शान्ति कराई, तरु बड़ा मान है। 

देव प्रिय है पलाश,ब्रम्हा विष्णु शिव वास, 

हिन्दू अनुष्ठान कास, संस्कृति की जान है। 

धीमी है विकास दर,बधे साल फुट भर,

खड़ा रहे जोश धर, भारतीय शान है।।६।। 


गंगा जमुना दो आब,खड़ा टेसू हो नवाब, 

पूरे जनता के ख्वाब, करता पलास है। 

किंशुक काम कास मे, साहित्य इतिहास मे,

मध्यप्रदेश पास मे,तेरा निज वास है। 

तू ही असरदार सिघ्र,सब की करे तू फिक्र, 

तेरा श्रंगार जिक्र,उत्मोत्तम कास है। 

पुष्पित पलाश जान,  लाल साड़ी ओढ़े मान, 

धरा नव वधू भान, कवि कालीदास है।।७।। 


कई भाषा मे सुना है, लोक साहित्य चुना है, 

मनमोहक गुना है, फूल न सुवास का। 

शिव पारवती संग, किया एकांत भंग, 

श्रापअग्नि देव दंग, हो तरु पलास का।

पुरब खिले पलाश, पुस्तक त्यागी की है कास, 

मृदुला का उपन्यास, करता प्रकाश है।

आँखो खिले पलाश मे, देवेंद्र दोहा कास मे, 

नचिकेता स्वास मे, विटप का वास है।।८।। 


पत्ते चिकने सबूत, पतले है मजबूत, 

गुण जिनमे अकूत, प्यारे पहचान लो। 

पत्तल बनाई जाती,ऋषि मुनियों सुहाती, 

प्रजा बेठ भोज पाती, कीमती है जान लो। 

फूल गंध हीन जान, नाप दोई इंच भान, 

पांच पंखुरियाँ शान, दो छोटी मान लो। 

एक तोते सी है बड़ी, घूमी हुई खड़ी खड़ी, 

सुन्दरता लिए अड़ी, तरु वाला ज्ञान लो।।९।। 


चमके फली धूसर, जुड़े दोऊ पुंकेश्वर,

फली आती रोयेंधर, चपटी सुहाती है। 

पश्चिम बंगाल जाने, होली का प्रतीक माने, 

लोग युद्ध भूमि ठाने, आँखो आगे आती है। 

तेलंगाना मे पलाश, शिव रात्रि पूजा काश, 

टेसू फूल रख पास, पूजा करी जाती है। 

यहा नही करे भूल, परम्परा मे है फूल,

शिव जी के अनुकूल,पूजा खूब भाती है।।१०।। 


- देवकी दर्पण

काव्य कुंज रोटेदा, 

बून्दी राजस्थान


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