शनिवार, २७ सप्टेंबर, २०२५

हैं दोनों मेरे हाथ सलामत....-कलाम अहमद खान


                       धन-आभूषण लूटनेवाले

हैं दोनों मेरे हाथ सलामत....


चुरा सके न कोई बुद्धि

हुनर हाथ का चल जाएगा

कोशिशों की झड़ी लगेंगी

परिश्रम का फल आएगा


जो कुछ भी है खोया मैंने

कर लूंगा मेहनत से हासिल

तब तक पांव नहीं थकेेंगे

जब तक मिल न जाए मंजिल


निंदा चाहे जितनी कर लो

रंग लाएगी मेरी मेहनत

धन-आभूषण लूटनेवाले

हैं दोनों मेरे हाथ सलामत....


वो ही महान धनी जगत में

ज्ञान को जिसने धन माना

घटे नहीं और बढ़ता जाए

चाहे लुटाओ मनमाना


सद्गुण कोई चुरा न पाए

कौन चुराए सदाचरण

यही तो सच्ची दौलत है

जो साथ रहेगी आमरण


दुनिया याद रखेगी मुझको

इन हाथों की देख करामत

धन-आभूषण लूटनेवाले

हैं दोनों मेरे हाथ सलामत....


                            -कलाम अहमद खान

भिवापुर, जि. नागपुर


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