दुनिया में सुख से जीने को
प्रभु,दो समय की रोटी देना...
फूटपाथ पर रहनेवाला
कोई श्रमिक भूखा न सोये
तड़प तड़प कर भूख से
यहां कोई बच्चा न रोये
मेहनत से डरते नहीं है
हाथ कभी रहे न खाली
रोजी-रोटी बनी रही तो
हम भी मनाए होली-दिवाली
हमें महल की आस नहीं है
कुटिया हक की छोटी देना
दुनिया में सुख से जीने को
प्रभु,दो समय की रोटी देना...
मजदूरी में जीवन बीता
हम तो पढ़-लिख न पाए
इतनी देना आय हमें कि
बच्चों को हम स्कूल भिजवाए
साक्षर होंगे-हुनर सिखेंगे
पेट अपना भर पाएंगे
अपने हाथों अपना भविष्य
वे स्वयं ही लिख पाएंगे
मजदूरों के बच्चों को भी
कामयाबी की चोटी देना
दुनिया में सुख से जीने को
प्रभु,दो समय की रोटी देना...
- कलाम अहमद खान,नागपुर
संवाद : ९६५७३४७६८८


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