मंगळवार, ९ सप्टेंबर, २०२५

बहुत नाजुक है डोर प्रीत की...कलाम अहमद खान

 


बहुत नाजुक है डोर प्रीत की

इसे संभालो टूट न जाए....


प्रीत कोई खेल नहीं है

इसमें शह या मात न हो

इक-दूजे के जज्बात संभाले

दिल में कोई घात न हो


मैं दीया तो तुम हो ज्योति

मैं सीप तो तुम हो मोती

लाख चेहरे दुनिया में लेकिन

प्रीत केवल एक से होती


प्यार करें तो सच्चे दिल से

स्वार्थ से कोई लूट न जाए

बहुत नाजुक है डोर प्रीत की

इसे संभालो टूट न जाए....


कीचड़ में खिलता है फिर भी

नीरज पर कोई दाग नहीं

ऐसी पावन प्रीत हो अपनी

झूठ का जिसमें भाग नहीं


मन को न घेरे कोई तमस

प्रीत के बदले प्रीत मिले बस

प्रीत हो पूजा और समर्पण

दिल जब हमने किया है अर्पण


अगर दिए न कोई उपहार

हम तुम दोनों रूठ न जाए

बहुत नाजुक है डोर प्रीत की

इसे संभालो टूट न जाए....

                                (नीरज-कमल)

- कलाम अहमद खान

भिवापुर,नागपुर

मो.९६५७३४७६८८


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