बुधवार, १० सप्टेंबर, २०२५

इन अंखियन में नीर न देना....- कलाम अहमद खान

 

पीर हृदय की हरने वाले

इन अंखियन में नीर न देना....


जब से ये सहवास मिला है

एक नया मधुमास मिला है

विरह तपन में तपने वाले

इन अधरों को हास मिला है


पंछी बन उडूं गगन में

खुशियां हो जीवन-मधुबन में

कोई निराशा रहे न मन में

खिले सपनों के फूल आंगन में


हाथ मेरा अब थामनेवाले

जुल्मोसितम की जंजीर न देना

पीर हृदय की हरने वाले

इन अंखियन में नीर न देना....


भालचंद्र मेरे तुम हो

तुम दीया हो मैं हूं बाती

तनमन सब सेवा में अर्पण

सुन लो मेरे जीवन साथी


खुशहाली हो गोकुल जैसी

अपना घर वृंदावन लागे

पाकर तुम्हे ये माना मैंने

सच में मेरे भाग ही जागे


प्रेम तुम्हारा पूर्ण मिले बस

दूर नफरत से कर न देना

पीर हृदय की हरने वाले

इन अंखियन में नीर न देना....


(पीर-पीड़ा,नीर-आंसू,अधर-होंठ )


- कलाम अहमद खान

भिवापुर, जि. नागपुर

संवाद : ९६५७३४७६८८


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